Home एकादशी कैलेंडर देवशयनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

देवशयनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक जुलाई 25, 2026 (शनिवार)
🗓️ तिथि आषाढ़, शुक्ल एकादशी
⏰ प्रारम्भ जुलाई 24, 09:12 AM
⏰ समाप्त जुलाई 25, 11:34 AM

1. दशमी तिथि से तैयारी

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • तामसिक भोजन और बुरी आदतों से दूर रहें।
  • मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें तथा स्वच्छ एवं पीले वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं देवशयनी एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु की पूजा करें

  • भगवान विष्णु का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • पीले पुष्प, चंदन, अक्षत एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप और दीप प्रज्वलित करें।
  • फल एवं नैवेद्य अर्पित करें।

5. भगवान विष्णु का शयन उत्सव

देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु को शयन कराने की परंपरा है।

  • भगवान को पीले वस्त्र अर्पित करें।
  • शेषनाग पर शयन करते हुए भगवान विष्णु का ध्यान करें।
  • “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें।

6. कथा एवं भजन

  • देवशयनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भजन-कीर्तन एवं सत्संग करें।

7. द्वादशी को पारण

द्वादशी तिथि में शुभ समय पर व्रत का पारण करें तथा दान-पुण्य करें।


देवशयनी एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ चातुर्मास के नियमों का संकल्प लें।
✅ दान-पुण्य करें।
✅ भजन, कीर्तन और सत्संग करें।


देवशयनी एकादशी पर क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन से दूर रहें।
❌ झूठ, निंदा और अपशब्दों से बचें।
❌ क्रोध एवं विवाद न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवशयनी एकादशी क्या है?
यह वह एकादशी है जिस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और चातुर्मास प्रारंभ होता है।
देवशयनी एकादशी को और किन नामों से जाना जाता है?
हरिशयनी एकादशी, आषाढ़ी एकादशी और पद्मा एकादशी।
चातुर्मास कब शुरू होता है?
देवशयनी एकादशी से चातुर्मास प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी तक चलता है।
देवशयनी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा मान्धाता और ऋषि अंगिरा से संबंधित है।
क्या महिलाएं देवशयनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों यह व्रत कर सकते हैं।
क्या इस दिन चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना गया है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
देवशयनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
भगवान विष्णु की कृपा, चातुर्मास का पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति।
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