Home एकादशी कैलेंडर सफला एकादशी 2026 – संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि, व्रत कथा

सफला एकादशी 2026 – संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि, व्रत कथा

📅 दिनांक जनवरी 10, 2026
🗓️ तिथि पौष कृष्ण , कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ जनवरी 10, 2026
⏰ समाप्त जनवरी 10, 2026

सफला एकादशी व्रत कथा

प्राचीन काल में चंपावती नामक नगरी में महिष्मान नाम के एक राजा राज्य करते थे। उनके चार पुत्र थे। सबसे बड़ा पुत्र लुम्पक अत्यंत दुराचारी, पापी और क्रूर स्वभाव का था। वह चोरी, जुआ और अन्य बुरे कर्मों में लिप्त रहता था।

राजा ने उसके दुष्कर्मों से परेशान होकर उसे राज्य से निकाल दिया। राज्य से निष्कासित होने के बाद वह जंगल में रहने लगा और चोरी करके अपना जीवन बिताने लगा।

एक दिन पौष कृष्ण एकादशी के दिन अत्यधिक ठंड के कारण वह एक पीपल के वृक्ष के नीचे पड़ा रहा। उसके पास खाने के लिए कुछ फल थे, जिन्हें उसने वृक्ष के नीचे रख दिया। उस दिन वह भोजन नहीं कर सका और अनजाने में उसका एकादशी व्रत हो गया। रातभर ठंड के कारण वह जागता रहा।

उसके द्वारा रखे गए फल भगवान विष्णु को अर्पित माने गए और उसका रात्रि जागरण भी हो गया। इस प्रकार अनजाने में ही उससे सफला एकादशी का व्रत सम्पन्न हो गया।

भगवान विष्णु उसकी इस भक्ति से प्रसन्न हुए और उसे नया जीवन प्रदान किया। उसके सारे पाप नष्ट हो गए। बाद में वह अपने राज्य लौटा, राजा बना और धर्मपूर्वक शासन किया। अंत में उसे भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति हुई।

इस कथा से शिक्षा मिलती है कि भगवान विष्णु की कृपा से सबसे बड़ा पापी भी सुधर सकता है और जीवन में सफलता प्राप्त कर सकता है।


सफला एकादशी व्रत में क्या करें?

✅ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ जरूरतमंदों को दान दें।
✅ सात्विक भोजन ग्रहण करें।
✅ रात्रि में भजन-कीर्तन करें।


सफला एकादशी व्रत में क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन से दूर रहें।
❌ क्रोध, झूठ और निंदा से बचें।
❌ किसी का अपमान न करें।
❌ लहसुन, प्याज एवं तामसिक पदार्थ न खाएं।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • सिंघाड़े का आटा
  • कुट्टू का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

सफला एकादशी के दिन पढ़ने योग्य मंत्र

विष्णु मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

श्री हरि मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे।
वासुदेवाय धीमहि।
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

विष्णु गायत्री मंत्र

ॐ नारायणाय विद्महे
वासुदेवाय धीमहि
तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सफला एकादशी किस देवता को समर्पित है?
सफला एकादशी भगवान श्री विष्णु को समर्पित है।
सफला एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?
जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए।
क्या सफला एकादशी पर चावल खा सकते हैं?
नहीं, एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है।
क्या बिना निर्जला व्रत के भी फल मिलता है?
हाँ, श्रद्धा और नियमपूर्वक फलाहार व्रत करने पर भी पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।
सफला एकादशी की कथा किसकी है?
यह कथा राजा महिष्मान के पुत्र लुम्पक की है, जिसने अनजाने में व्रत करके भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में पारण करना चाहिए।
सफला एकादशी का मुख्य संदेश क्या है?
भगवान विष्णु की भक्ति से जीवन में सफलता प्राप्त होती है और पापों का नाश होता है।
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