Home एकादशी कैलेंडर सफला एकादशी 2026 – संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि, व्रत कथा

सफला एकादशी 2026 – संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि, व्रत कथा

📅 दिनांक जनवरी 10, 2026
🗓️ तिथि पौष कृष्ण , कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ जनवरी 10, 2026
⏰ समाप्त जनवरी 10, 2026

1. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष दीप जलाकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

ममाखिलपापक्षयपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं सफला एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

3. भगवान विष्णु का पूजन करें

  • भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं।
  • चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
  • तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं।
  • धूप-दीप प्रज्वलित करें।

4. विष्णु मंत्र का जप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।

या

ॐ विष्णवे नमः।

5. एकादशी व्रत कथा सुनें

पूजा के दौरान सफला एकादशी की कथा का श्रवण अवश्य करें।

6. रात्रि जागरण

संभव हो तो भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करें।

7. द्वादशी पर पारण

अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत का पारण करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सफला एकादशी किस देवता को समर्पित है?
सफला एकादशी भगवान श्री विष्णु को समर्पित है।
सफला एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता है?
जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति प्राप्त करने के लिए।
क्या सफला एकादशी पर चावल खा सकते हैं?
नहीं, एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है।
क्या बिना निर्जला व्रत के भी फल मिलता है?
हाँ, श्रद्धा और नियमपूर्वक फलाहार व्रत करने पर भी पूर्ण पुण्य प्राप्त होता है।
सफला एकादशी की कथा किसकी है?
यह कथा राजा महिष्मान के पुत्र लुम्पक की है, जिसने अनजाने में व्रत करके भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त की।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में पारण करना चाहिए।
सफला एकादशी का मुख्य संदेश क्या है?
भगवान विष्णु की भक्ति से जीवन में सफलता प्राप्त होती है और पापों का नाश होता है।
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