Home एकादशी कैलेंडर वरुथिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

वरुथिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक मई 9, 2026 (शनिवार)
🗓️ तिथि वैशाख, कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ मई 08, 09:07 AM
⏰ समाप्त मई 09, 08:37 AM

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नामक एक महान और धर्मपरायण राजा राज्य करते थे। वे भगवान विष्णु के परम भक्त थे और सदैव धर्म के मार्ग पर चलते थे।

एक बार राजा मान्धाता वन में कठोर तपस्या कर रहे थे। उसी समय एक भालू ने उन पर आक्रमण कर दिया और उनका पैर चबा लिया। तपस्या में लीन होने के कारण राजा ने कोई प्रतिरोध नहीं किया और भगवान विष्णु का स्मरण करते रहे।

राजा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने भालू को दूर भगा दिया। हालांकि राजा का पैर गंभीर रूप से घायल हो चुका था।

भगवान विष्णु ने राजा को वैशाख कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी का व्रत करने का निर्देश दिया। राजा ने श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन किया।

व्रत के प्रभाव से राजा का शरीर पुनः स्वस्थ हो गया और उन्हें पूर्ववत तेज, बल और सौभाग्य प्राप्त हुआ। अंततः उन्हें भगवान विष्णु के धाम की प्राप्ति हुई।

यह कथा दर्शाती है कि भगवान विष्णु की भक्ति और वरुथिनी एकादशी का व्रत जीवन के बड़े से बड़े संकटों से रक्षा करने की शक्ति रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वरुथिनी एकादशी किस महीने में आती है?
वरुथिनी एकादशी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
वरुथिनी एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी पापों से मुक्ति, सौभाग्य की प्राप्ति और जीवन के संकटों से रक्षा के लिए की जाती है।
वरुथिनी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा मान्धाता और भगवान विष्णु की कृपा से संबंधित है।
क्या महिलाएं वरुथिनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या वरुथिनी एकादशी पर चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
वरुथिनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
सौभाग्य, भगवान विष्णु की कृपा, पापों से मुक्ति और जीवन की रक्षा।
इस दिन कौन-सा दान करना शुभ माना जाता है?
अन्न, वस्त्र, जल, फल और दक्षिणा का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
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