Home एकादशी कैलेंडर वरुथिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

वरुथिनी एकादशी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, महत्व, पारण नियम एवं संपूर्ण जानकारी

📅 दिनांक मई 9, 2026 (शनिवार)
🗓️ तिथि वैशाख, कृष्ण एकादशी
⏰ प्रारम्भ मई 08, 09:07 AM
⏰ समाप्त मई 09, 08:37 AM

1. दशमी तिथि से नियमों का पालन

  • सात्विक भोजन ग्रहण करें।
  • क्रोध, झूठ और नकारात्मक विचारों से बचें।
  • ब्रह्मचर्य एवं संयम का पालन करें।

2. प्रातःकाल स्नान करें

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें तथा स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

3. व्रत का संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष जल लेकर व्रत का संकल्प करें।

संकल्प मंत्र:

मम समस्त पापक्षयपूर्वक श्रीविष्णुप्रीत्यर्थं वरुथिनी एकादशी व्रतमहं करिष्ये।

4. भगवान विष्णु की पूजा करें

  • भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • गंगाजल से शुद्धिकरण करें।
  • चंदन, अक्षत, पुष्प एवं तुलसी दल अर्पित करें।
  • धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।
  • फल एवं नैवेद्य अर्पित करें।

5. मंत्र जाप करें

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः॥

या

ॐ विष्णवे नमः॥

6. कथा श्रवण एवं भजन

  • वरुथिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करें।
  • विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
  • भगवान विष्णु के भजन एवं कीर्तन करें।

7. द्वादशी को पारण करें

द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त के भीतर व्रत का पारण करें और दान-पुण्य करें।


वरुथिनी एकादशी पर क्या करें?

✅ भगवान विष्णु की पूजा करें।
✅ तुलसी दल अर्पित करें।
✅ विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
✅ गरीबों को अन्न एवं वस्त्र दान करें।
✅ भजन-कीर्तन एवं सत्संग करें।
✅ जरूरतमंदों की सहायता करें।


वरुथिनी एकादशी पर क्या न करें?

❌ चावल का सेवन न करें।
❌ मांस, मदिरा एवं तामसिक भोजन से दूर रहें।
❌ क्रोध और विवाद से बचें।
❌ झूठ और निंदा न करें।
❌ किसी का अपमान न करें।


व्रत में क्या खा सकते हैं?

  • फल
  • दूध
  • दही
  • मखाना
  • साबूदाना
  • कुट्टू का आटा
  • सिंघाड़े का आटा
  • राजगीरा
  • सूखे मेवे

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वरुथिनी एकादशी किस महीने में आती है?
वरुथिनी एकादशी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आती है।
वरुथिनी एकादशी का मुख्य महत्व क्या है?
यह एकादशी पापों से मुक्ति, सौभाग्य की प्राप्ति और जीवन के संकटों से रक्षा के लिए की जाती है।
वरुथिनी एकादशी की कथा किससे संबंधित है?
यह कथा राजा मान्धाता और भगवान विष्णु की कृपा से संबंधित है।
क्या महिलाएं वरुथिनी एकादशी का व्रत कर सकती हैं?
हाँ, महिलाएं और पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक यह व्रत कर सकते हैं।
क्या वरुथिनी एकादशी पर चावल खाना चाहिए?
नहीं, एकादशी के दिन चावल का सेवन वर्जित माना जाता है।
व्रत का पारण कब करना चाहिए?
द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय के भीतर पारण करना चाहिए।
वरुथिनी एकादशी का सबसे बड़ा फल क्या है?
सौभाग्य, भगवान विष्णु की कृपा, पापों से मुक्ति और जीवन की रक्षा।
इस दिन कौन-सा दान करना शुभ माना जाता है?
अन्न, वस्त्र, जल, फल और दक्षिणा का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
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