वट पूर्णिमा पूजा विधि


वट पूर्णिमा ज्येष्ठ पूर्णिमा को महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक और दक्षिण भारत की सुहागिन महिलाएँ पति की दीर्घायु के लिए मनाती हैं। यह उत्तर भारत के वट सावित्री व्रत (ज्येष्ठ अमावस्या) का ही रूप है — कथा (सावित्री-सत्यवान) और बरगद पूजा समान है, केवल तिथि पूर्णिमांत/अमांत पंचांग परंपरा के कारण लगभग 15 दिन बाद पड़ती है। स्कंद पुराण और भविष्य पुराण की परंपरा में यह व्रत पूर्णिमा से जुड़ा बताया गया है।
📅 वट पूर्णिमा 2027 कब है? शुक्रवार, 18 जून 2027 ⏳ 233 दिन बाकी
ज्येष्ठ पूर्णिमा — 18 जून सुबह 4:35 से 19 जून सुबह 6:15 तक (IST)। पूर्णिमा दोनों दिन सूर्योदय पर है; अपने क्षेत्र का पंचांग देखें। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →
वट पूर्णिमा और वट सावित्री में अंतर
| वट सावित्री | वट पूर्णिमा | |
|---|---|---|
| तिथि | ज्येष्ठ अमावस्या | ज्येष्ठ पूर्णिमा |
| क्षेत्र | UP, बिहार, MP, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा | महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक |
| व्रत अवधि | प्रायः एक दिन | कुछ परिवारों में त्रयोदशी से पूर्णिमा तक तीन दिन |
| कथा व वृक्ष | दोनों में सावित्री-सत्यवान कथा और वट पूजा | |
पूजा सामग्री
- सावित्री-सत्यवान का चित्र, बरगद का वृक्ष या उसकी टहनी
- सफ़ेद या पीला कच्चा सूत, हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल
- हरी चूड़ियाँ, मंगलसूत्र/सौभाग्य सामग्री, साड़ी-चोली का कपड़ा (ओटी भरने के लिए)
- पाँच प्रकार के फल (आम, केला, जामुन आदि), भीगे चने/अंकुरित दाने, पूरनपोली या मिठाई
- जल भरा कलश, दीपक, अगरबत्ती, नारियल
पूजा विधि — चरणबद्ध
- संकल्प: प्रातः स्नान कर पारंपरिक साड़ी (महाराष्ट्र में नववारी/नथ सहित) पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- वट वृक्ष पूजन: पेड़ की जड़ में जल अर्पित करें, हल्दी-कुमकुम, अक्षत और फूल चढ़ाएँ।
- सौभाग्य अर्पण: चूड़ियाँ, सौभाग्य सामग्री, पाँच फल और नैवेद्य अर्पित करें।
- सूत लपेटना: “सावित्री” का स्मरण करते हुए कच्चा सूत तने पर लपेटकर 7 परिक्रमा करें।
- कथा: सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें — पूरी कथा वट सावित्री पूजा विधि पृष्ठ पर है।
- प्रार्थना: “जन्मोजन्मी हाच पति मिळो” — अगले जन्मों में भी यही पति मिले, यह महाराष्ट्र की प्रचलित प्रार्थना है।
- वाण/ओटी भरना: अन्य सुहागिनों को हल्दी-कुमकुम लगाकर फल, चने और सौभाग्य सामग्री का वाण दें।
- पारण: शाम को या अगले दिन परंपरा अनुसार व्रत खोलें।
ध्यान रखें
- ✅ शहरों में पेड़ पर भीड़ से बचने के लिए कई मंदिर/सोसायटी सामूहिक पूजा रखती हैं — समय पहले पता कर लें।
- ✅ पेड़ की शाखाएँ काटकर घर न लाएँ; गमले में लगी टहनी से पूजा करें या चित्र का उपयोग करें।
- ✅ ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पूर्णिमा व्रत और स्नान-दान की भी परंपरा है — सत्यनारायण पूजा विधि देखें।
इस पूजा से जुड़े उपयोगी पृष्ठ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वट पूर्णिमा कब होती है? (When is Vat Purnima?)
ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को, जो प्रायः जून में आती है — उत्तर भारत के वट सावित्री व्रत के लगभग 15 दिन बाद।
वट पूर्णिमा और वट सावित्री एक ही व्रत हैं? (Are they the same?)
भाव और कथा एक है; अंतर केवल तिथि और क्षेत्रीय परंपरा का है — अमावस्या (उत्तर भारत) बनाम पूर्णिमा (महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण भारत)।
वट पूर्णिमा पर क्या अर्पित करें? (What to offer?)
हल्दी-कुमकुम, अक्षत, फूल, चूड़ियाँ, पाँच फल, भीगे चने और मिठाई; साथ में कच्चा सूत।
वट पूर्णिमा पर कितनी परिक्रमा करते हैं? (How many rounds?)
महाराष्ट्र में प्रायः सात परिक्रमा कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती हैं।
वाण क्या होता है? (What is vaan?)
सुहागिनों को आपस में दिया जाने वाला सौभाग्य-उपहार — हल्दी-कुमकुम, फल, चने, चूड़ियाँ आदि।
यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।