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राम नवमी पूजा विधि

📅 21 अगस्त 2026 ⏱️ 4 मिनट पढ़ने का समय
राम नवमी पूजा विधि के लिए सजी पूजा चौकी और प्रमुख सामग्री

राम नवमी चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्रीराम का जन्म अयोध्या में राजा दशरथ और माता कौशल्या के यहाँ पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्न और मध्याह्न के समय हुआ था — इसलिए राम नवमी की मुख्य पूजा मध्याह्न मुहूर्त में की जाती है। यही दिन चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन भी है।

📅 राम नवमी 2027 कब है? गुरुवार, 15 अप्रैल 2027   ⏳ 169 दिन बाकी

चैत्र शुक्ल नवमी — 14 अप्रैल दोपहर 3:24 से 15 अप्रैल दोपहर 1:21 तक; मध्याह्न पूजा 15 अप्रैल को (जयपुर)। सभी व्रत-त्योहार: हिंदू कैलेंडर →

राम नवमी पूजा सामग्री

  • राम दरबार का चित्र (श्रीराम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान) या बाल राम की मूर्ति
  • छोटा पालना (जन्मोत्सव के लिए), पीला वस्त्र
  • रोली, चंदन, अक्षत, तुलसी दल, पीले-लाल फूल, माला
  • पंचामृत, गंगाजल, घी का दीपक, धूप, कपूर
  • भोग: पंजीरी (धनिया पंजीरी), खीर, फल, पंचामृत, पान
  • रामचरितमानस या वाल्मीकि रामायण

पूजा विधि — चरणबद्ध

  1. स्नान व संकल्प: प्रातः स्नान कर व्रत (फलाहार या निराहार) का संकल्प लें।
  2. पूजा स्थान: चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर राम दरबार स्थापित करें, कलश रखें।
  3. मध्याह्न जन्मोत्सव: दोपहर लगभग 12 बजे के मुहूर्त में शंख-घंटी बजाकर जन्मोत्सव मनाएँ। बाल राम को पंचामृत से स्नान कराकर वस्त्र पहनाएँ और पालने में झुलाएँ।
  4. पूजन: रोली, चंदन, अक्षत, फूल, तुलसी दल अर्पित करें; सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी का भी पूजन करें।
  5. मंत्र: “श्री राम जय राम जय जय राम” (तारक मंत्र) या “ॐ श्री रामाय नमः” का 108 बार जप।
  6. पाठ: रामचरितमानस के बालकांड से “भए प्रगट कृपाला दीनदयाला” छंद का पाठ करें, जो राम जन्म का वर्णन है।
  7. भोग व आरती: पंजीरी, खीर, फल का भोग लगाकर “श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन” से आरती करें।
  8. कन्या पूजन: नवरात्रि का समापन होने से कई घरों में इसी दिन कन्या पूजन भी होता है।
  9. पारण: पूजा के बाद या अगले दिन सात्विक भोजन से व्रत खोलें।

राम नवमी और अन्य परंपराएँ

  • अयोध्या: सरयू स्नान और राम जन्मभूमि मंदिर में विशेष उत्सव।
  • शोभा यात्रा: कई शहरों में राम दरबार की झाँकियों के साथ यात्राएँ निकलती हैं।
  • अखंड रामायण पाठ: कई घरों और मंदिरों में नवरात्रि से रामायण पाठ चलकर नवमी को पूर्ण होता है।
  • हनुमान जी: राम पूजा के साथ हनुमान पूजा अवश्य करें — हनुमान पूजा विधि; चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती आती है।

नवरात्रि की पूरी विधि के लिए दुर्गा पूजा विधि देखें। खाटू श्याम मंदिर में भी चैत्र नवरात्रि और राम नवमी पर भीड़ रहती है — दर्शन समय देख कर जाएँ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम नवमी कब मनाई जाती है? (When is Ram Navami?)

चैत्र शुक्ल नवमी को, जो प्रायः मार्च-अप्रैल में आती है। यह चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन भी है।

राम नवमी की पूजा किस समय करें? (Best time for puja?)

मध्याह्न मुहूर्त में, क्योंकि श्रीराम का जन्म दोपहर के समय हुआ माना जाता है। सटीक मुहूर्त अपने शहर के पंचांग से देखें।

राम नवमी पर क्या भोग लगाएँ? (What bhog to offer?)

धनिया पंजीरी, खीर, पंचामृत और मौसमी फल — उत्तर भारत में पंजीरी का भोग विशेष रूप से प्रचलित है।

राम नवमी पर कौन-सा पाठ करें? (Which path to recite?)

रामचरितमानस का बालकांड, विशेष रूप से “भए प्रगट कृपाला” छंद, या सुंदरकांड और राम रक्षा स्तोत्र।

क्या राम नवमी पर कन्या पूजन कर सकते हैं? (Can we do kanya pujan?)

हाँ, नवरात्रि का समापन होने से कई परिवार अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन करते हैं — अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।

यह पूजा विधि प्रचलित लोक-परंपरा और शास्त्रीय संदर्भों पर आधारित सरल घरेलू क्रम है। अपनी कुल-परंपरा या आचार्य के निर्देश को प्राथमिकता दें।

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