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वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, मंत्र व उद्यापन (Vaibhav Laxmi)

📿 देवी-देवताओं की पूजा विधि 📅 9 अक्टूबर 2026 ⏱️ 6 मिनट पढ़ने का समय

वैभव लक्ष्मी व्रत (Vaibhav Laxmi Vrat) शुक्रवार को रखा जाता है। प्रचलित परंपरा में व्रती 11 या 21 शुक्रवार का संकल्प लेते हैं, शाम को श्री यंत्र और माँ लक्ष्मी के चित्र के सामने कलश पर रखे सोने/चाँदी के आभूषण या सिक्के की पूजा करते हैं, खीर का भोग लगाते हैं और व्रत कथा पढ़ते हैं। अंतिम शुक्रवार को उद्यापन किया जाता है। नीचे पूरी विधि, सामग्री, मंत्र और नियम क्रम से दिए हैं।

📌 संक्षेप में: दिन — शुक्रवार · संख्या — 11 या 21 शुक्रवार (संकल्प के अनुसार) · समय — शाम (प्रदोष काल) · भोग — खीर/चावल की मीठी खीर · समापन — उद्यापन, 7 सुहागिनों/कन्याओं को प्रसाद व वैभव लक्ष्मी व्रत कथा पुस्तक भेंट।

वैभव लक्ष्मी व्रत क्या है?

वैभव लक्ष्मी, माँ लक्ष्मी का वह स्वरूप माना जाता है जो घर में सुख, धन और स्थिरता देता है। यह व्रत विशेष रूप से गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर भारत के घरों में लोकप्रिय है। इसे स्त्री-पुरुष दोनों रख सकते हैं; अधिकतर परिवारों में घर की महिलाएँ यह व्रत करती हैं। यह व्रत किसी शास्त्रीय तिथि से नहीं, बल्कि संकल्प से बँधा होता है — यानी आप जिस शुक्रवार से शुरू करें, उसी क्रम में 11 या 21 शुक्रवार पूरे करते हैं। माँ लक्ष्मी की सामान्य पूजा की विधि के लिए लक्ष्मी पूजा विधि भी देखें।

व्रत कब और कैसे शुरू करें

  • शुरुआत: किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से शुरू करना शुभ माना जाता है। तिथियाँ और पक्ष जानने के लिए हिंदू कैलेंडर 2026-27 देखें।
  • संकल्प: पहले शुक्रवार को पूजा से पहले हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर बोलें कि आप कितने शुक्रवार व्रत करेंगे और किस मनोकामना से।
  • बीच में बाधा: मासिक धर्म, सूतक, यात्रा या बीमारी के कारण कोई शुक्रवार छूट जाए तो उसे गिनती में न लें और अगले शुक्रवार से क्रम जारी रखें — यही प्रचलित नियम है।
  • दीवाली के आस-पास: कई परिवार धनतेरस–दीवाली के समय व्रत शुरू करते हैं। उस समय की पूजा के लिए धनतेरस पूजा विधि और दीवाली मुहूर्त देखें।

वैभव लक्ष्मी पूजा सामग्री

  • माँ वैभव लक्ष्मी का चित्र और श्री यंत्र (चित्र या धातु का)
  • चौकी, लाल कपड़ा, एक मुट्ठी चावल (चौकी पर ढेरी बनाने के लिए)
  • ताँबे/पीतल का कलश, जल, कलश पर रखने के लिए कटोरी
  • सोने या चाँदी का कोई आभूषण / सिक्का (न हो तो एक रुपये का सिक्का भी रखा जाता है)
  • रोली (कुमकुम), हल्दी, अक्षत, लाल फूल (गुलाब/कमल), इत्र
  • घी का दीपक, धूप/अगरबत्ती, कपूर
  • भोग: खीर या गुड़/मिश्री; फल
  • वैभव लक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक

पूरी सामान्य सूची के लिए पूजा सामग्री लिस्ट देखें।

वैभव लक्ष्मी व्रत विधि — चरणबद्ध

  1. सुबह: स्नान कर साफ़ (हो सके तो लाल या सफ़ेद) वस्त्र पहनें और मन में व्रत का स्मरण करें। दिन भर फलाहार या एक समय भोजन — अपनी सेहत के अनुसार।
  2. शाम की तैयारी: सूर्यास्त के बाद पूजा स्थान साफ़ करें। पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उस पर चावल की छोटी ढेरी बनाएँ।
  3. कलश स्थापना: ढेरी पर जल भरा कलश रखें, उस पर कटोरी रखें और कटोरी में सोने/चाँदी का आभूषण या सिक्का रखें। (कलश की विस्तृत विधि घटस्थापना विधि में दी है।)
  4. श्री यंत्र और चित्र: कलश के पास श्री यंत्र और माँ वैभव लक्ष्मी का चित्र रखें। प्रचलित परंपरा में पूजा से पहले माँ लक्ष्मी के अष्ट स्वरूपों (धन, धान्य, धैर्य, शौर्य, विद्या, कार्य, विजय, राज लक्ष्मी) को प्रणाम किया जाता है।
  5. पूजन: पहले गणेश जी का ध्यान करें (गणेश पूजा विधि)। फिर आभूषण/सिक्के और श्री यंत्र पर रोली, हल्दी, अक्षत और लाल फूल चढ़ाएँ। घी का दीपक और धूप जलाएँ।
  6. भोग: खीर या मिश्री का भोग लगाएँ।
  7. कथा: वैभव लक्ष्मी व्रत कथा श्रद्धा से पढ़ें या सुनें।
  8. आरती: कपूर जलाकर लक्ष्मी जी की आरती करें, फिर मनोकामना कहें।
  9. प्रसाद और भोजन: पूजा के बाद प्रसाद परिवार में बाँटें, फिर स्वयं भोजन करें। कलश का जल तुलसी या किसी पौधे में डाल दें, और आभूषण वापस सुरक्षित रख लें।

वैभव लक्ष्मी मंत्र

पूजा के समय नीचे दिया गया लक्ष्मी बीज मंत्र 108 बार (एक माला) जपा जा सकता है:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

छोटा मंत्र: ॐ महालक्ष्म्यै नमः — जो लोग लंबा मंत्र नहीं पढ़ पाते, वे इसी का जाप करें। मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण से ज़्यादा महत्व श्रद्धा का है।

उद्यापन विधि (अंतिम शुक्रवार)

संकल्प के अंतिम शुक्रवार को सामान्य पूजा के बाद उद्यापन किया जाता है:

  1. पूजा में नारियल चढ़ाएँ और खीर का भोग लगाएँ।
  2. प्रचलित परंपरा में 7 सुहागिन स्त्रियों या कन्याओं (कुछ परिवार 11) को कुमकुम का तिलक लगाकर खीर/प्रसाद दिया जाता है।
  3. हर एक को वैभव लक्ष्मी व्रत कथा की पुस्तक भेंट की जाती है, ताकि यह व्रत आगे और घरों तक पहुँचे।
  4. माँ लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि व्रत में हुई भूल को क्षमा करें। चाहें तो उसी दिन से अगला संकल्प ले सकते हैं।

व्रत के नियम — क्या करें, क्या न करें

  • शुक्रवार को घर में कलह न करें; घर साफ़ रखें — माँ लक्ष्मी स्वच्छता से प्रसन्न मानी जाती हैं।
  • व्रत के दिन खट्टी चीज़ें न खाने की परंपरा कई परिवारों में है।
  • पूजा शाम को ही करें; सुबह केवल स्नान और स्मरण।
  • दिखावे या बिना श्रद्धा के व्रत न करें — यह इस व्रत की मूल सीख मानी जाती है।
  • गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग या बीमार लोग निर्जल न रहें; फल-दूध लेकर व्रत करें।

अन्य शुक्रवार/लक्ष्मी संबंधी पूजा

धन और समृद्धि से जुड़ी अन्य पूजाएँ: दीवाली लक्ष्मी पूजा विधि, सत्यनारायण पूजा विधि, विष्णु पूजा विधि और अक्षय तृतीया पूजा। सभी विधियाँ एक जगह: पूजा विधि हिंदी में।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

How many Fridays is Vaibhav Laxmi vrat kept? वैभव लक्ष्मी व्रत कितने शुक्रवार करें?

प्रचलित परंपरा में 11 या 21 शुक्रवार का संकल्प लिया जाता है। संख्या पहले शुक्रवार को संकल्प में तय की जाती है और अंतिम शुक्रवार को उद्यापन होता है।

Can Vaibhav Laxmi vrat be done without gold? क्या सोना न हो तो व्रत कर सकते हैं?

हाँ। सोना न हो तो चाँदी का आभूषण या सिक्का, और वह भी न हो तो एक रुपये का सिक्का कटोरी में रखकर पूजा की जाती है। महत्व वस्तु का नहीं, श्रद्धा का है।

What time should Vaibhav Laxmi puja be done? पूजा किस समय करें?

शुक्रवार की शाम, सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल में) पूजा करना प्रचलित है। सुबह केवल स्नान करके व्रत का स्मरण किया जाता है।

What if a Friday is missed? अगर कोई शुक्रवार छूट जाए तो क्या करें?

छूटे हुए शुक्रवार को गिनती में न लें और अगले शुक्रवार से क्रम जारी रखें। मासिक धर्म या सूतक के दिनों में भी यही नियम अपनाया जाता है।

What is offered as bhog? वैभव लक्ष्मी को क्या भोग लगाएँ?

खीर सबसे प्रचलित भोग है; गुड़, मिश्री या फल भी चढ़ाए जाते हैं। उद्यापन के दिन खीर और नारियल चढ़ाया जाता है।

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